Tuesday, March 17, 2026

उठती रही वो लहर। (ग़ज़ल)

उठती रही वो लहर। (ग़ज़ल)

तेरी यादों का सफ़र आँखों से गुज़री लहर,
मेरे दिल में आज तक उठती रही वो लहर।

रात की खामोशियों में याद तेरी आ गई,
मेरी आँखों में फिर से बन गई इक लहर।

चाँद भी चुपचाप सा बादल में छिपता ही रहा,
दिल के सागर में मगर उठती रही वो लहर।

तेरे कदमों की आहट दूर से जब सुनाई दी,
मेरी धड़कन में अचानक जाग उठी इक लहर।

साथ गुज़रे वो पल यादों में महकते ही रहे,
मन के सागर में हमेशा चलती रही वो लहर।

दूरियों ने भी हमें तुमसे जुदा कर ना सका,
मेरे अरमानों में अब भी है वही लहर।

जब भी तन्हाई में दिल तुमको पुकारे चुपके से,
मेरी सांसों में मचलती है कोई लहर।

जी आर दिल की कहानी यूँ ही कहता ही रहा,
तेरी यादों से उठी बन गई जीवन की लहर।


जी आर कवियुर 
12 03 2026
( कनाडा , टोरंटो)

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