Tuesday, March 24, 2026

झील की संध्या

झील की संध्या 

पिछले पानी के किनारे संध्या डूब रही है,  
रोशनी धीरे-धीरे, जैसे हल्की बारिश, मंद पड़ रही है।  
ठंडी हवा और पत्तियों की लय,  
हृदय में प्रतिबिंबित होकर संगीत बन जाती है।  

पक्षी पेड़ों में शांत होकर बैठते हैं,  
पानी धीरे-धीरे किनारे से टकराकर मुस्कराता है।  
सुनहरी किरणें पानी की लहरों पर खेलती हैं,  
पत्थरों की मौनता छाया के बहाव की गवाह है।  

इस संध्या की सुंदरता में,  
समय यादों के साथ धीरे-धीरे बहता है।  
हृदय की लय झील के पानी के साथ जुड़ जाती है,  
जीवन की सुंदरता हर याद में भर जाती है।  

जी आर कवियूर
18 03 2026  
(कनाडा, टोरंटो)

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