महकती है। (ग़ज़ल )
गजरों में तेरी याद सदा महकती है,
मेरी हर एक ग़ज़ल भी तुझसे महकती है।
तेरे ख्यालों से दिल मेरा भर जाता है,
तन्हाई की हर रात भी महकती है।
तेरा नाम ही दिल में गूंजता रहता है,
मेरे मन की हर बात यूँ महकती है।
गुलशन में तेरे ही रंग नजर आते हैं,
हर एक कली तेरे जैसी महकती है।
मैं तो हूँ बस तेरे प्यार का दीवाना,
तेरे दिल में मेरी चाहत महकती है।
जब भी तू सामने आ जाता है मेरे,
रूह की हर एक सांस भी महकती है।
तेरे बिना ये दुनिया सूनी लगती है,
तेरे होने से हर राह महकती है।
'जीआर' की दुनिया में तेरी ही खुशबू है,
मेरी हर एक धड़कन तुझसे महकती है।
जी आर कवियुर
24 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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