Tuesday, March 17, 2026

अधूरी तमन्नाएँ (ग़ज़ल)

अधूरी तमन्नाएँ (ग़ज़ल)

चंद तारों को छूने की तमन्ना तो थी
मगर तेरे बिना ये पूरी कैसे होगी समझ न थी

तेरी आँखों में जो सपनों की चमक देखी थी
उस चमक के बिना दुनिया में कोई रोशनी न थी

दिल ने चाहा था तेरे साथ सफ़र उम्र भर का
राह में तेरे बिना कोई भी मंज़िल खुशी न थी

रात तन्हा थी मगर चाँद भी खामोश रहा
जैसे उसकी भी कहानी में कोई चाँदनी न थी

तेरी यादों का सहारा ही मिला जीने को
वरना इस दिल में धड़कने की भी कोई वजह न थी

ख़्वाब बिखरे तो पता चला मोहब्बत क्या है
वरना इस दिल को दर्द की कोई भी सज़ा न थी

अब ग़ज़ल बनके तेरी याद ही लब पर आई
जी आर की इस दिली दास्ताँ में तेरे सिवा कोई न थी

जी आर कवियुर 
06 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)


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