चंद तारों को छूने की तमन्ना तो थी
मगर तेरे बिना ये पूरी कैसे होगी समझ न थी
तेरी आँखों में जो सपनों की चमक देखी थी
उस चमक के बिना दुनिया में कोई रोशनी न थी
दिल ने चाहा था तेरे साथ सफ़र उम्र भर का
राह में तेरे बिना कोई भी मंज़िल खुशी न थी
रात तन्हा थी मगर चाँद भी खामोश रहा
जैसे उसकी भी कहानी में कोई चाँदनी न थी
तेरी यादों का सहारा ही मिला जीने को
वरना इस दिल में धड़कने की भी कोई वजह न थी
ख़्वाब बिखरे तो पता चला मोहब्बत क्या है
वरना इस दिल को दर्द की कोई भी सज़ा न थी
अब ग़ज़ल बनके तेरी याद ही लब पर आई
जी आर की इस दिली दास्ताँ में तेरे सिवा कोई न थी
जी आर कवियुर
06 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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