ठंडी हवा में प्रेम
ठंडी हवा में मैं तुम्हें खोजता हूँ,
पत्तियों की सरसराहट में तुम्हारी आवाज़ सुनता हूँ।
हृदय में प्यार बर्फ की तरह धीरे-धीरे बरसता है,
अनकहे शब्दों में यह कसकर बंधा है।
जब हवा हमारे हाथों से हल्की टकराती है,
मैं सोचता हूँ, क्या दिल की लय साथ चलती है।
क्षण की रोशनी में तुम्हारी आँखें देखकर,
समय ठहर जाता है, हृदय गहराई में धड़कता है।
स्नेह सितारों की तरह चमकता और छिपता है,
हवा के हल्के स्पर्श से सपने जागते हैं।
जब तुम और मैं एक साथ होते हैं,
दुनिया मौन होकर इसका साक्षी बन जाती है।
जी आर कवियुर
12 03 2026
( कनाडा , टोरंटो)
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