यादों में आज भी वो रातें जागती हैं तुम्हारे लिए
आँसू चुपचाप बहते रहे हर पल तुम्हारे लिए
भूल नहीं पाया वो मीठे दर्द दिल के भीतर
आज भी धड़कता है ये दिल बस तुम्हारे लिए
ख़्वाहिशों के रंग चुपके से बरसते रहे दिल में
कितने सपने सँजोकर रखा मैंने तुम्हारे लिए
एक नज़र की रोशनी पाने को भटकता रहा दिल
प्यासा सा ये मन तड़पता रहा तुम्हारे लिए
कितनी बार निगाहें आपस में टकराई चुपचाप
दिल का सच मगर छुपा रहा हमेशा तुम्हारे लिए
लोगों की नज़रों से बचकर चलता रहा वो रास्ता
यादों के पन्नों में सब कुछ रखा तुम्हारे लिए
जब भी तन्हा देखा तुम्हें कहना तो बहुत कुछ था
सादे से शब्द ढूँढता रहा मैं तुम्हारे लिए
इन राज़ों और ख़्वाहिशों का वो अजब सा रिश्ता
साँसों के आख़िरी सफ़र तक रहेगा तुम्हारे लिए
मोहब्बत के अक्षरों से ये दास्ताँ मिटेगी नहीं
दिल की किताब में लिखी है हमेशा तुम्हारे लिए
विरह की स्याही से शेर लिखता रहा मैं तुम्हारे लिए
“जी आर” आज भी यादों में जीता है तुम्हारे लिए
जी आर कवियुर
12 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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