Tuesday, March 17, 2026

मौसमों का उपन्यास

मौसमों का उपन्यास

धरती के सीने पर कहानियाँ लिखकर,
वक्त बदलता है पन्ने हर रोज़ नए।
तपती धूप की जो लिखी थी पंक्तियाँ,
वसंत मिटा देता है उसे तितली बनके।

इंद्रधनुष से सजे वो रंगीन चित्र,
काले बादलों की लिखी वो कविताएँ।
कोहरे की चादर ओढ़े वो सर्दी का मौसम,
यादों से भर देता है मन की दिशाएँ।

ऋतुओं का यह सुंदर सा उपन्यास,
कुदरत की लिखावट में खिलता है।
धरती पर एक अटूट सफर की तरह,
हर दिन एक नई ताज़गी में मिलता है।


जी आर कवियुर 
16 03 2026
(कनाडा , टोरंटो)

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