अरे इंसान, समझो तुम
यह धरती सिर्फ़ तुम्हारी नहीं है
चुपचाप देखो उन मासूम जीवों को
जो निस्वार्थ हैं, पवित्र और निर्दोष
[Pallavi]
अरे इंसान, समझो तुम
यह धरती सिर्फ़ तुम्हारी नहीं है
ओ ओ ओ ओहो आ आह
ओ ओ ओ ओहो आ आह
[Verse 2]
जमीन और आसमान तुम्हारे हो सकते हैं
पर इंसान ने क्रूरता फैलाई बहुत
स्वार्थ और लड़ाई में चोट खाए ये जीव
मौन सहते हैं, तुम बस देखो
[Verse 3]
प्यार की बारिश हो, हर वन में गूंजे
हिंसा से मुक्त एक दुनिया उगें
हम सब मिलकर बचाएं ये माटी
उठे शांति का नया गीत
[Pallavi]
अरे इंसान, समझो तुम
यह धरती सिर्फ़ तुम्हारी नहीं है
ओ ओ ओ ओहो आ आह
ओ ओ ओ ओहो आ आह
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