Tuesday, March 17, 2026

नारी की रोशनी(ग़ज़ल)

नारी की रोशनी
(ग़ज़ल)

माँ के आँचल में मोहब्बत की रोशनी देखी
बहन की बातों में करुणा की चाँदनी देखी

दर्द सीने में छुपाकर भी जो मुस्काती है
हमने उस चेहरे पे हिम्मत की रोशनी देखी

घर के आँगन में जो हर रोज़ दिया जलता है
उस दिए में भी किसी नारी की रोशनी देखी

राह मुश्किल हो तो भी साथ निभाती है जो
उसके कदमों में सदा सच्ची सादगी देखी

वक्त बदले तो भी जो राह दिखाती जाए
उसकी आँखों में नई सुबह की रोशनी देखी

आदि शक्ति की झलक हर रूप में मिलती है
"जी आर" ने जहाँ देखा, नारी की रोशनी देखी

जी आर कवियुर 
08 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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