Tuesday, March 17, 2026

आत्मा की यात्रा (ग़ज़ल)

आत्मा की यात्रा (ग़ज़ल)

राहें लंबी थीं, पर बढ़ती रही आत्मा की यात्रा,
तन ठहर गया यहाँ, पर चलती रही आत्मा की यात्रा।

धूप और छाँव में सहती रही हर पीड़ा,
सबको सहते हुए बढ़ती रही आत्मा की यात्रा।

टूटे ख्वाबों में भी जलता रहा उम्मीद का दीप,
रात ढलती रही, चमकती रही आत्मा की यात्रा।

मंज़िलें दूर थीं, मगर हौसले न थमे,
समय के साथ सँवरती रही आत्मा की यात्रा।

दुनिया की भीड़ में तन्हा हर इंसान,
भीतर ही भीतर पलती रही आत्मा की यात्रा।

“जी आर” ये जिस्म मिट्टी में मिल जाएगा एक दिन,
पर वक्त से परे चलती रहेगी आत्मा की यात्रा।

जी आर कवियुर 
11 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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