Tuesday, March 24, 2026

जल की सरगम”

 जल की सरगम”

बूँदें गिरें, फैलाए मृदु ध्वनि,
रेत पर लिखतीं कहानियाँ चुपचाप कहीं।
नरम बहाव में जन्में विचार नये,
स्थिरता में भी जीवन भरे साये।

आने वाली लहरें मन को ठंडक दें,
किनारे शांत स्वप्नों में रहें संजोए।
जब हवा धीरे बहती धारा को छूए,
लहरों में जागे मधुर संगीत झूले।

साया लंबा कंधों पर फैलता है,
क्या प्रकृति अपने रहस्य बताती है?
मौन धारा में छुपा एक स्वर,
हृदय तक पहुंचाए मार्ग नरम और दूर।

जी आर कवियुर 
23 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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