मौन में भी दिल ने गीत गाया,
बरसात की बूँदों में उसने सफ़र पाया,
छोटे–छोटे स्थानों में महसूस किया हवा का खेल,
कष्टों से उभरी नई सच्चाई की रेख।
ठंडी रातों में आशा को थामे रखा,
छूटे हुए यादों में करुणा को देखा,
दुःख की यात्राओं में वीरता छुपकर खड़ी रही,
स्नेह और देखभाल को दिल ने नज़दीक से तौला।
अज्ञात राहों में विश्वास की चमक मिली,
अनजाने प्रवाह में सपनों को छुआ,
साहसिक यात्राओं में शांति का अमृत चखा,
जीवन की सुंदरता हर पल दिखाई दी।
जी आर कवियुर
09 03 2026
( कनाडा, टोरंटो)
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